Friday, May 29News That Matters

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खिचड़ी भोज जैसी परंपराएँ सामाजिक एकता को सुदृढ़ करती हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराती हैं

 

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खिचड़ी भोज जैसी परंपराएँ सामाजिक एकता को सुदृढ़ करती हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराती हैं

 

 

 

टनकपुर स्थित शारदा घाट में आयोजित पारंपरिक माघ खिचड़ी भोज कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सहभाग कर प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति से जुड़ाव का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं को स्वयं प्रसाद वितरित किया तथा स्थानीय नागरिकों के साथ बैठकर माघ खिचड़ी प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्थानीय महिलाओं के साथ कुमाऊँ की प्राचीन लोक परंपरा “खड़ी होली” में भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में घेरा बनाकर खड़े होकर कुमाऊँनी लोकगीत गाए, जिनमें मुख्यमंत्री ने भी स्वर मिलाया।
ढोल-दमाऊँ और लोकधुनों की मधुर लय पर पूरा वातावरण भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक गौरव से ओतप्रोत हो उठा। टनकपुर की गलियों में गूंजती खड़ी होली ने कुमाऊँ की जीवंत लोक परंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि माघ मास श्रद्धा, सादगी, संयम और समरसता का प्रतीक है। खिचड़ी भोज जैसी परंपराएँ समाज को एक सूत्र में बांधती हैं, वहीं खड़ी होली जैसी लोक विधाएँ हमें अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत से जोड़ती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएँ सामाजिक एकता को सुदृढ़ करती हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *